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सोमवार, 12 नवंबर 2018

तुमने पूछा
कौन हैं हम आपके
शब्द और प्रश्न
सरल और सीधे हैं
उत्तर कठिन
जटिल है अभिब्यक्ति
भाषा और भावनाओं से
यह भी बधें होते
सीमाओं के दायरे में
सुनो
जानना ही चाहती हो
तो किसी -
पहाड़ी नदी के कलकल में
बाँसुरी के स्वर-लहरियों में
टूटते तारों की चमक में
सूर्य की पहली किरण में
मदिर बयारों में
किसी मासूम की हँसी में
मिल जाएगा
 प्रश्न का उत्तर
कोशिश करके देखो
दिखाई पड़ जाऊँगा तुम्हारे ही अंदर
थामें तेरी असीम भुजाओं को
एकाकार होती चन्द्र की धवल रश्मियों में
तुझमे ही जन्मा
तुझमें ही खेला
तुझमे  ही पला
तुझमे विलीन हो जाऊँगा
न मैं था
न मैं हूँ
न मैं रहूंगा
तुम थी
तुम हो
तुम रहोगी
और मैं तुझमे

विक्रम

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