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शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

साथी दूर विहान हो रहा

 रवि रजनी का कर आलिंगन
 अधरों को दे क्षण भर बन्धन 

 कर पूरी लालसा प्रणय की, मंद-मंद मृदु गान कर रहा 

 साथी दूर विहान हो रहा 

 अपना सब कुछ आज लुटाकर
 तृप्ति  हुयी  यौवन सुख  पाकर 

 शरमाई रजनी से रवि को, प्रेम भरा प्रतिदान मिल रहा 

 साथी दूर विहान हो रहा

 रजनी पार क्षितिज के जाती 
 आँखों   से आँसू  छलकाती 

 झरते आँसू पोछ किरण से, रवि रजनी का मान रख रहा 

 साथी दूर विहान हो रहा 

 विक्रम

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