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रविवार, 25 जनवरी 2009

रात के.....................

रात के अन्धेरे में
मै
अपने दर्द को
हौले-हौले थपथपा के सहला के
सुलाने का प्रयास करता रहा
और तेरी यादें
किसी नटखट बच्चे की तरह
आ-आकर
न उसे सोने देती,न मुझे सुलाने देती
मै चिडचिडाता हूँ,बिगडता हूँ
पर सच तो यह है
मै
अपने आप को,यह समझा नहीं पाता हूं
कि मेरा दर्द और तेरी यादें
अलग-अलग नहीं एक है
तू नहीं तो क्या
मेरे पास
हमारे टूटे घरौदे के
कुछ अवशेष
अभी भी शेष हैं
vikram

3 टिप्‍पणियां:

  1. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  2. गणतंत्र दिवस के पुनीत पर्व के अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामना और बधाई .

    उत्तर देंहटाएं
  3. विक्रम जी कविता achchee लिखी है



    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं