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रविवार, 19 जुलाई 2009

मानव ह्रदय में......

मानव ह्रदय में
प्रभुता,सम्पन्नता, योग्यता के ,प्रश्न उभरे

मुख से -ब्राम्हण
बाहु से -क्षत्रिय
जंघा से-वैश्य
पद से ,शूद्र जन्में
योग्यता कर्म की नहीं ,जाति की गुलाम हो गयी
अहम् बढ़ता गया
राम ने शूद्र को फांसी दी
द्रोणाचार्य ने ,एकलव्य का अंगूठा लिया
मुख ,बाहू,जंघा ने
पैर को गौण बना दिया
पैर डगमगा गए
देखिए,सब अपनी औकात मे आ गये
vikram

8 टिप्‍पणियां:

  1. क्या कहू व कैसे कहू ,अति उत्तम .बहुत सुन्दर .बाकी रचना द्वारा जाहिर कराती हूँ .
    मानव ह्रदय में
    प्रभुता,सम्पन्नता, योग्यता के ,प्रश्न उभरे
    मुख से -ब्राम्हण
    बाहु से -क्षत्रिय
    जंघा से-वैश्य
    पद से ,शूद्र जन्में
    योग्यता कर्म की नहीं ,जाति की गुलाम हो गयी
    अहम् बढ़ता गया
    राम ने शूद्र को फांसी दी
    द्रोणाचार्य ने ,एकलव्य का अंगूठा लिया
    मुख ,बाहू,जंघा ने
    पैर को गौण बना दिया
    पैर डगमगा गए
    देखिए,सब अपनी औकात मे आ गये .
    जाती विशेष पर अच्छा लिखा .

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  2. अन्योन्याश्रित योग्यताए दम्भ नही भर सकती.
    बहुत खूब औकात दिखाया है आपने.

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  3. जब अपने ऊपर पलट वार होता है तो शासक रहे ग़ुलाम महसूस करते हैं जो ग़ुलाम थे उन्हें ज़रा सी सहूलियत मिली तो शासक रहे अपना दर्द को वाचने लगते हैं। हम इंसान हैं यह बात कब समझेंगे।
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    पढ़िए: ब्रह्माण्ड का सबसे पुराना सुपरनोवा खोजा गया

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  4. Ap to bahut sundar likhte hain, bachhon ke liye bhi kuchh likhen.

    Wishing "Happy Icecream Day"...See my new Post on "Icecrem Day" at "Pakhi ki duniya"

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  5. लाजवाब, उत्तम समयनुसार..........आज के ज्वलंत प्रश्न ढूंढती रचना

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  6. बहुत सुन्दर.समीचीन व्याख्या...बधाई.

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