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बुधवार, 29 जुलाई 2009

नही क्षणिक प्रिय ध्येय हमारे......

नही क्षणिक प्रिय ध्येय हमारे

आशा के विस्तृत प्रदेश में

उत्साहित ह्रद भरा जोश में

जीवन समर सरल हों जायें , यदि प्रिय धर लो नेह हमारे

नहीं क्षणिक प्रिय ध्येय हमारे

उर भय ग्रसित न प्रणय हमारे

फिर क्यूँ चिंतित नयन तुम्हारे

कंचन बदन कनक मद लेकर, आई हों मन द्वार हमारे

नहीं क्षणिक प्रिय ध्येय हमारे

चिर आपेक्षित मिलन हमारा

काल-चक्र भी हमसे हारा

जग जीवन के सभी नियंत्रण, तोड़ बढे पग आज हमारे

नहीं क्षणिक प्रिय ध्येय हमारे

vikram

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना है.... प्रेम की मधुर अभिव्यक्ति... सच में मिलन तो अनंत काल का होना चाहिए ........

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  2. प्रेम रस की बारिश मे नहाती सुन्दर अभिव्यक्ति शुभकामनायें

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  3. SAHI ME KAHA JAYE TO PREM SANSAARIKA AWASTHA ME PREM HO HI NAHI SAKATA ......PREM AATMIK HONA CHAHIYE JO KAL SE PARE JAKAR MILE OUR YUGO TAK HI NAHI SRISTI SE PARE HO JAHA MAYA MOH KUCHH BHI NA HO ANYTHA PREM PREM KE RUP ME MIL HI NAHI SAKATA BAHUT HI SUNDAR

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  4. ... बहुत सुन्दर, अतिसुन्दर रचना !!!

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