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मंगलवार, 15 जून 2010

दिलीप जी ने कल अपनी टिप्पणी में कहा" kalam bhi chalaate rahiye sir... " चाहता तो मै भी यही हूँ,पर यह स्वास्थ साथ ही नही दे रहा। न कुछ लिख पाता हूँ,न दूसरो के ब्लॉग ही देख पाता हूँ। अपनी पुरानी दो लाइनो के माध्यम से यही कहूगा......

अर्थ हीन सम्वादों का सिलसिला
मै तोडना नही चाहता
शायद इसी बहाने
मै तुम्हे छोडना नही चाहता


विक्रम

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना, विक्रम जी !

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  2. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  3. कम शब्द पर बहुत ही भावपूर्ण..बधाई

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  4. स्वास्थ्य की कीमत पर कुछ नहीं... स्वास्थ्य लाभ की कामना

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