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सोमवार, 16 अगस्त 2010

काश ऐसा न हो....

कल स्वत्रन्त्रता दिवस पर लोगो की उदासीनता देख मन भारी हो गया। सरकारी स्तर पर होने वाले आयोजन भी रश्मी बन कर रह गये है। आने वाले कल में जिनके बदौलत यह आजादी नसीब हुयी,उनके साथ साथ हम आजादी के माइने भी न भूल जाए। काश ऐसा न हो.......

vikram

6 टिप्‍पणियां:

  1. उदासीनता भी तो मायने रखती ही है .. क्यों उदासीन होते जा रहे है, विचारणीय है.

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  2. समारोहों की औपचारिकता ही बना रही है उदासीन ...!

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  3. जिस दिन आजादी के मायने भूल जाएंगे उस दिन आजादी भी छिन जाएगी।

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  4. काश आज की युवा पीडी इस बात को समझे ...

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  5. baat to sahi kahi hai aapne.......aisa ho bhi sakta hai jab tak halat nahi sudhrenge.

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