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शनिवार, 10 अगस्त 2013

मरने की तमन्ना में. . . . . . .




मरने  की  तमन्ना  में , जीने  का बहाना  है

हर रात के  आँचल  में,ख़्वाबों का खजाना है

फुरसत से  कभी  आओ,हमराज बना   लेगें

 वह दौर क़यामत  तक, तुमसे  ही निभा देगें

दुनिया तो है दो पल की,यह साथ पुराना है

मरने  की  तमन्ना   में , जीने  का  बहाना   है

थम-थम के जो बरसे तो ,पलकों को गिले होगें

गमें-राह  में चलने के , मंजर  न   बयां    होगें

अश्कों चलन में  ही , उल्फत का  फसांना   है

 मरने  की  तमन्ना  में , जीने का  बहाना  है

इस दिल की तमन्ना को ,कुछ भी तो शिला दोगे

 इक राज बना इनको ,दामन में  छिपा  लोगे

अब रंग  बना  उनको, सपनों को सजाना  है

मरने  की  तमन्ना  में, जीने  का बहाना   है

विक्रम

7 टिप्‍पणियां:

  1. मरने की तमन्ना में , जीने का बहाना है
    बहुत सुन्दर रचना ,सुन्दर अभिव्यक्ति !
    latest post नेताजी सुनिए !!!
    latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. फुरसत से कभी आओ,हमराज बना लेगें
    वह दौर क़यामत तक, तुमसे ही निभा देगें ..

    बहुत ही खूबसूरत गज़ल ... हर शेर प्रेम का पैगाम लिए ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुती।।।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut sunder srimaan ji..................laajbaav

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