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रविवार, 3 नवंबर 2013

आ,साथी नव दीप जलाएँ

आ,साथी नव दीप जलाएँ

दूर घ्रणा का करें अँधेरा
प्रेम राग का रहे  बसेरा

युग-युग की वेदना मिटा दे,ऎसी कोई राह बनाएँ

आ,साथी नव दीप जलाएँ

देवगगन में  अब  हम जाएँ
नया दिवाकर ले कर आएँ

तृष्णा के घन अँधियारे को,आ उससे ही दूर भगाएँ

आ,साथी नव दीप जलाएँ

निज विलास से  बाहर आएँ
नर नारायण फिर मिल जाएँ

किरण पुंज प्रज्ञा में चमके,भेद अंनत सुलझ सब जाएँ

आ,साथी नव दीप जलाएँ

विक्रम


दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना !
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट आओ हम दीवाली मनाएं!

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  2. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !
    दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाए...!
    ===========================
    RECENT POST -: दीप जलायें .

    उत्तर देंहटाएं
  3. नव दीप यूं ही जलते रहें ...
    दीपावली की बधाई और शुभकामनायें ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह...बहुत सुन्दर....बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी जली है बहू जली है

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