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शनिवार, 31 जनवरी 2009

अर्थ हीन .......





अर्थ हीन सम्वादो का सिलसिला
मै तोडना नही चाहता
शायद इसी बहाने
मै तुम्हे छोडना नही चाहता

विक्रम

3 टिप्‍पणियां:

  1. raah yun hi khuli rehni chaahiye..


    ...badey mun kii baat padhney mili yahan..

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  2. संवाद स्वयं में ही सौन्दर्यपूर्ण और सार्थक होता है. किसी बाह्य अर्थ का साथ उसे चाहिये भी कहां .
    सुन्दर रचना .

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