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शुक्रवार, 10 जुलाई 2009

जीवन का सफर चलता ही रहें ,चलना हैं इसका काम

जीवन का सफर चलता ही रहें ,चलना हैं इसका काम

कहीं तेरे नाम ,कहीं मेरे नाम ,कहीं और किसी के नाम

हर राही की अपनी राहे, हैं अपनी अलग पहचान

मंजिल अपनी ख़ुद ही चुनते, पर डगर बडी अनजान

खो जाती सारी पहचाने, जो किया कहीं विश्राम

कहीं तेरे नाम ,कहीं मेरे नाम ,कहीं और किसी के नाम

इन राहों में मिलते रहते,कुछ अपने कुछ अनजान

हर राही के आखों में सजे कुछ सपने कुछ अरमान

सपनों से सजी इन राहों में, कहीं सुबह हुयी कहीं शाम

कहीं तेरे नाम कहीं मेरे नाम कहीं और किसी के नाम

vikram

8 टिप्‍पणियां:

  1. सचमुच जीवन तो चलने का ही नाम है और रूकना मौत की निशानी।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  2. जीवन के सफर के अद्भुत पडावो का दर्शन
    बहुत सफल रचना

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  3. "सपनों से सजी इन राहों में, कहीं सुबह हुयी कहीं शाम
    कहीं तेरे नाम कहीं मेरे नाम कहीं और किसी के नाम"
    रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई....

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  4. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति .........

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  5. जीवन को अच्छी तरह दर्शाया है आपने

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  6. सपनों से सजी इन राहों में, कहीं सुबह हुयी कहीं शाम

    कहीं तेरे नाम कहीं मेरे नाम कहीं और किसी के नाम
    बहुत सुन्दर .

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