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सोमवार, 31 अगस्त 2009

अर्थ हीन .......

आज एक पुरानी रचना पु:न प्रकाशित कर रहा हूँ, शायद आप को पसंद आये






अर्थ हीन सम्वादों का सिलसिला
मै तोडना नही चाहता
शायद इसी बहाने
मै तुम्हे छोडना नही चाहता


विक्रम

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ---
    चित्र जो आपने लगाया वह भी तो एक कविता ही है

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  2. आपके शब्द सच्चाई के करीब हैं .

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  3. लाजवाब गागर मे सागर बधाई

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  4. लाजवाब गागर मे सागर बधाई

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  5. बड़ा गूढ़़ बहाना है..बेहतरीन

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  6. थोड़े शब्दों में गहरी बात ,बहुत सुंदर

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  7. Aapki kawita aur cchitr dono hee sunder aur ek doosare ke poorak bhee.

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  8. गूढ़ शब्दों के दंगल में फोटो भी बड़ी प्यारी टांगी है !

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  9. भावाभिव्यक्ति और चित्र में कौन अधिक श्रेष्ठ है ?.कहना मुश्किल है.बधाई ,

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  10. गागर में सागर भरा है आपने बहुत गहरे और सुंदर भाव

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  11. अर्थहीन संवाद ही तो हर तरफ व्याप्त है पर आपके ब्लाग पर सुन्दर रचना और बेहतरीन चित्र का संयोग संवादहीनता का तो दर्शन कम से कम नहीं करा रहा है, आपके , चित्र के संवाद सभी अच्छी तरह समझ रहे हैं और यह सभी टिप्पणियों में भलीभांति झलक भी रहा है.

    हार्दिक बधाई............

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  12. vikram ji blog par encouraging comment dene ke liye bahut bahut dhanyavaad..aap jaise varisth sahityakaar aur blogger se kafi kuch seekhnaa hai abhi..Thanks!

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  13. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

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  14. VAAH ..... SACH MEIN BAS UNKAA SAATH JAROORI HAI ... KUCH BHI HO JAAYE ...LAJAWAAB HAI SIR ...

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