Click here for Myspace Layouts

मंगलवार, 8 सितंबर 2009

दर्द को दिल में उतर जाने दो.......

दर्द को दिल में उतर जाने दो
आज उनको भी कहर ढाने दो

रात हर चाँद से होती नहीं मसरुफे-सुखन
स्याह रंगो के नजारे भी नजर आने दो

एक अनजानी सी तनहाई, सदा रहती है
आज महफिल में उसे नज्म कोई गाने दो

जिनने दरियाओं के मंजर ही नहीं देखे हैं
उन सफीनो पे-भी अफसोस जरा करने दो

कोई वादे को निभा दे यहाँ ऐसा तो नहीं
सर्द वादों को कोई राह नई चुनने दो

दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो
[अपूर्वजी, के दिये सुझाव के अनुसार आखिरी शेर मे बदलाव किया हॆ]

विक्रम[पुन:प्रकाशित ]

rege

22 टिप्‍पणियां:

  1. एक और बेहतरीन और नये अर्थ जगाती रचना..बधाई..यह पंक्तियाँ खास लगीं
    रात हर चाँद से होती नहीं मसरुफे-सुखन
    स्याह रंगो के नजारे भी नजर आने दो

    कई बातें कह डालीं एक साथ..

    ..आखिरी शेर मे चंद/कुछ प्रयोग दोहराव तो नही?

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपूर्वजी,
    शायद, आखिरी "आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो"में
    जनाजा मुझे ले जाने दो,का प्रयोग दोहराव हो सकता हॆ,कभी कभी लिखते वक्त ऎसा हो जाता हॆ, जहा आप को दोहराव महसूस हुआ हो,उसे बतला दे,तो उसमें बदलाव कर देता,

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत आनन्द आया पढ़कर. बेहतरीन रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  4. माफ़ कीजियेगा विक्रम जी..शायद मैं अपनी बात ठीक से नही कह सका..आपकी यह पंक्ति
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो
    मे कोई कमी नही है बल्कि निहायत ही खूबसूरत है..
    बदली हुई पंक्ति
    आज महफिल में जरा चुप ही मुझे रहने दो
    भी अच्छी बन पड़ी है मगर original ज्यादा खूबसूरत बन पड़ी है..
    मेरे कहने का मतलब था कि पंक्ति
    चंद कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    मे ’चंद’ और ’कुछ’ दोनो का अर्थ तो एक ही है..सो इनमे से किसी एक से भी काम चल जाता..
    जैसे
    दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    (यह बस मेरा स्पष्टीकरण है सुझाव नही)
    ..मेरे ख्याल से यह कोई बहुत खास कमी नही है..मुझे कुछ दोहराव सा लगा तो बता दिया..
    ..और हाँ आखिरी पक्ति को वैसा ही रहने दीजिये..बहुत गहरी बात कहती है
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो
    खूबसूरत.
    और मेरी बात इतनी सीरियसली भी न लें ;-)

    उत्तर देंहटाएं
  5. धन्यवाद अपूर्वजी,
    आपने बिल्कुल सही सुझाव दिया हॆ,दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं.

    उत्तर देंहटाएं
  6. स्याह रंगों के नज़ारे यह एक अच्छा प्रयोग है । आप अपनी रचनाओं के लिये मेहनत कर रहे हैं और सुझावों को स्वीकार कर रहे है यह भी एक अच्छे रचनाकार का गुन है । बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! रचना का हर एक शब्द दिल को छू गई! इस बेहतरीन और लाजवाब रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ !

    उत्तर देंहटाएं
  8. दिल के कुछ राज़ यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो

    वाह, वाह, बहुत ही गहरी बात कह दी आपने.
    बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  9. रात हर चाँद से होती नहीं मसरुफे-सुखन
    स्याह रंगो के नजारे भी नजर आने दो


    वाह ! वाह ! वाह ! लाजवाब ! हमेशा की तरह मन को छूती हुई अतिसुन्दर रचना....बड़ा आनंद आया पढ़कर...आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  10. जिनने दरियाओं के मंजर ही नहीं देखे हैं
    उन सफीनो पे-भी अफसोस जरा जताने दो !

    कोई वादे को निभा दे यहाँ ऐसा तो नहीं
    सर्द वादों को कोई राह नई ढूंढ लाने दो !

    Bahut khoob, Vikram ji

    उत्तर देंहटाएं
  11. दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो

    बहुत ही लाजवाब प्रस्‍तुति, आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. दर्द को दिल में उतर जाने दो
    आज उनको भी कहर ढाने दो

    रात हर चाँद से होती नहीं मसरुफे-सुखन
    स्याह रंगो के नजारे भी नजर आने द
    दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो
    वैसे तो पूरी रचना लाजवाब है मगर उपर वाले शेर बहुत पसंद आये बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  13. दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो
    कमाल की अभिव्यक्ति है .......बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  14. दर्द को दिल में उतर जाने दो
    आज उनको भी कहर ढाने दो..dard or dil ka rishta naya nahi hai...dil hai to dard to hoga hi..eska koee nahi hai hal shayad.....khoobsurat rachna....

    उत्तर देंहटाएं
  15. "दिल के कुछ राज़ यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं,
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो"
    बहुत ही अच्छी लगी ये रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  16. 'दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो
    '
    ग़ज़ल का यह शेर ख़ास लगा.

    उत्तर देंहटाएं
  17. एक अनजानी सी तनहाई, सदा रहती है
    आज महफिल में उसे नज्म कोई गाने दो........

    बहुत ही अच्छी लगी ग़ज़ल ........लाजवाब प्रस्‍तुति विक्रम JI

    उत्तर देंहटाएं
  18. अपने जनाजे में दिल के राज़ दफ़न करने चले...
    हौसले की बात है ..!!

    उत्तर देंहटाएं
  19. दर्द को दिल में उतर जाने दो.......
    दर्द को दिल में उतर जाने दो
    आज उनको भी कहर ढाने दो

    रात हर चाँद से होती नहीं मसरुफे-सुखन
    स्याह रंगो के नजारे भी नजर आने दो

    एक अनजानी सी तनहाई, सदा रहती है
    आज महफिल में उसे नज्म कोई गाने दो

    जिनने दरियाओं के मंजर ही नहीं देखे हैं
    उन सफीनो पे-भी अफसोस जरा करने दो

    कोई वादे को निभा दे यहाँ ऐसा तो नहीं
    सर्द वादों को कोई राह नई चुनने दो

    दिल के कुछ राज यहाँ यूँ ही दफन होते नहीं
    आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो.poori rachana laazwaab .maza aa gaya padhkar .main ek mahine se bahar thi is liye nahi aa payi .

    उत्तर देंहटाएं